नई दिल्ली ; याचिका में 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को विशेष जांच दल द्वारा दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली, जकिया जाफरी की अपील आज खारिज कर दी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने मामले की आगे की जांच के लिए जाफरी को उच्च फोरमों में जाने की अनुमति दे दी है। दंगों में मारे गये पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया और कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस’ ने एसआईटी की क्लीन चिट को बरकरार रखने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ अदालत में आपराधिक समीक्षा याचिका दायर की थी। मजिस्ट्रेट ने दंगों के पीछे ‘‘बड़ी आपराधिक साजिश’’ के आरोपों के संबंध में मोदी और अन्य लोगों को एसआईटी द्वारा दी गयी क्लीन चिट को सही बताया था।

 

2002 का गुजरात दंगा : नरेंद्र मोदी पर लगे थे ये आरोप​



दिवंगत पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी जकिया और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटीजन फार जस्टिस एंड पीस’ ने दंगों के पीछे ‘‘बड़ी आपराधिक साजिश’’ के आरोपों के संबंध में पीएम मोदी और अन्य को एसआईटी द्वारा दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखने के मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ आपराधिक पुनर्विचार याचिका दायर की थी

 

याचिका में मांग की गई थी कि मोदी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों एवं नौकरशाहों सहित 59 अन्य को साजिश में कथित रूप से शामिल होने के लिए आरोपी बनाया जाए. इसमें इस मामले की नए सिरे से जांच के लिए उच्च न्यायालय के निर्देश की भी मांग की गई थी

 

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