प्राचीन ग्रंथो उपनिषद एवं पुराण अदि का अवलोकन करे तो पाएंगे की अदि काल से भगवान विश्वकर्मा अपने विशित ज्ञान एवं विज्ञानं के कारण ही ना केवल मानवो अपितु देवगणो द्वारा भी पूजित है हमारे धर्मशत्रो और ग्रंथो मै विश्वकर्मा के पांच स्ववरूपो ओर अवतारों का वर्णन है विराट विश्वकर्मा धर्मवंशी विश्वकर्मा अगिरवंशी विश्वकर्मा सुधनवा विश्वकर्मा ओर बुगुवांशी विश्वकर्मा इस बार विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर को धूमधाम से मनाई जायगी इस दिन औघोगिक क्षेत्रों फैक्ट्री लोहे की दुकान वाहन शोरूम सर्विस सेंटर कंप्यूटर सेंटर हार्डवेयर दुकाने अदि मै विश्वकर्मा भगवान की विधिवित पूजा की जाती है इस शुभ अवसर मशीन औजारो की सफाई एवं रंगराजन किया जाता है विश्वकर्मा जयंती वाले दिन अधिकतर कल कारखाने बंद रहते है ओर लोग हर्षोल्लाष के साथ भगवान् विश्वकर्मा की पूजा करते है क्या है भगवान विश्वकर्मा की कथा
सृष्टि की रंचना के प्रारम्भ में भगवान विष्णु क्षीर सागर में प्रकट हुए। विष्णु जी के नाभि-कमल से ब्रह्मा जी उत्पन्न हुये थे। ब्रह्मा जी के पुत्र का नाम धर्म था, जिसका विवाह वस्तु नामक स्त्री से हुआ। धर्म और वस्तु के संसर्ग से सात पुत्र उत्पन्न हुए। सातवें पुत्र का नाम वास्तु रखा गया, जो शिल्पशास्त्र की कला में पारंगत था। वास्तु के एक पुत्र हुआ, जिसका नाम विश्वकर्मा रखा गया, जिन्होंने वास्तुकला में महारथ हासिल करके एक नयी मिशाल कायम की ऐसे करे भगवान् विश्वकर्मा की पूजा विश्वकर्मा पूजा के लिए व्यक्ति को प्रात स्नान आदि करने के बाद अपनी पत्नी सहित यज्ञ के लिए पूजा स्थल पर बैठे हाथ मै फूल अछत लेकर भगवान् विश्वकर्मा की पूजा करते करते समय दीप धूप पुष्प गंध सुपारी आदि का प्रयोग करना चाहिए। पूजा स्थान पर कलश में जल तथा विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए विशेष महत्व है औजारों की पूजा का
विश्वकर्मा प्रतिमा पर फूल चढ़ने के बाद सभी औजारों की तिलक लगा के पूजा करनी चाहिए। अंत में हवन कर सभी लोगों में प्रसाद का वितरण करना चाहिए। विश्वकर्मा पूजा के समय इस मंत्र का जाप करके अपनी मनोकमना की प्रार्थना करनी चाहिए ‘‘ ऊॅ श्री श्रीष्टिनतया सर्वसिधहया विश्वकरमाया नमो नमः विश्वकर्मा पूजा विधिवत करने से जातक के घर में धन-धान्य तथा सुख-समृद्धि की कभी कोई कमी नही रहती है। भगवान विश्वकर्मा के प्रश्न होने से व्यक्ति के व्यवसाय मै वृद्धि होती है थता इच्छित मनोकामना पूरी होती है

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